Love in December
मिलते ही आज उससे पहली बार, एक अनूठा सा हुआ एहसास! उसके प्यारे से चेहरे को देख, हुआ फिर से मोहब्बत का आगाज़!! कभी उसका चुप रहना, तो कभी प्यारी सी मुस्कान देना! खिचने लगा था मैं उसकी ओर, आखिर प्यार पर चला है किसका ज़ोर!! मासूमियत से भरा वो उसका चेहरा, अभी भी मेरी नज़रों के सामने है! ऐसी भोली आखों को देखे, बीत गए ज़माने है!! इस मुलाक़ात का असर कुछ हुआ है यूँ, के आज फिर किसी के लिए जीने का मन कर रहा है! लगता है पुराने ज़ख्म भर चुके है अब, जो ये दिल-ए-नादां फिर किसी के प्यार में पड़ रहा है!! आज फिर रखना होगा इस दिल पर काबू, क्योंकि दुनिया में प्यार के अलावा भी बहुत काम है! कोई नहीं करेगा इस दिल पर ऐतबार अब, क्योंकि दिल की दुनिया में मेरा नाम तो पहले से ही बदनाम है!!